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आप दौलत के!
आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें, हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं| साहिर लुधियानवी
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बात निभा देते हैं!
हम से दीवाने कहीं तर्क-ए-वफ़ा करते हैं, जान जाए कि रहे बात निभा देते हैं| साहिर लुधियानवी
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शो’लों को हवा देते हैं!
जुर्म-ए-उल्फ़त पे हमें लोग सज़ा देते हैं, कैसे नादान हैं शो‘लों को हवा देते हैं| साहिर लुधियानवी
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ज़िंदगानी में क्या रहेगा!
न सोचने पर भी सोचती हूँ कि ज़िंदगानी में क्या रहेगा, तिरी तमन्ना को दफ़्न कर के तिरे ख़यालों से दूर जा के| साहिर लुधियानवी
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सुनेंगे जो नाम तेरा!
कभी मिलेंगे जो रास्ते में तो मुँह फिरा कर पलट पड़ेंगे, कहीं सुनेंगे जो नाम तेरा तो चुप रहेंगे नज़र झुका के| साहिर लुधियानवी
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वर्ष मास दिन याद नहीं हैं!
आज एक बार फिर से मैं, अपंने समय में हिन्दी काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंग जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत – वर्ष मास…
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जिएँ कैसे तुझे भुला के
तुझे भुला देंगे अपने दिल से ये फ़ैसला तो किया है लेकिन, न दिल को मालूम है न हम को जिएँगे कैसे तुझे भुला के| साहिर लुधियानवी
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वफ़ा ने उजाड़ दी हैं!
बुझा दिए हैं ख़ुद अपने हाथों मोहब्बतों के दिए जला के, मिरी वफ़ा ने उजाड़ दी हैं उमीद की बस्तियाँ बसा के| साहिर लुधियानवी
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जो हादिसा नहीं!
न जाने क्यूँ मुझे लगता है ऐसा हाकिम-ए-शहर, जो हादिसा नहीं पहले हुआ वो अब होगा| शहरयार
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हवा के रुख़ बदलने से!
कोई नहीं है जो बतलाए मेरे लोगों को, हवा के रुख़ के बदलने से क्या ग़ज़ब होगा| शहरयार