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बच्चा!
आज एक बार फिर से मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में उल्लेखनीय योगदान करने वाले श्री रामदरश मिश्र जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| बच्चे पर यह कविता तीन भाग में लिखी गई है| मिश्र जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री…
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दोस्त यूँ तो सब होगा!
जहाँ में होने को ऐ दोस्त यूँ तो सब होगा, तिरे लबों पे मिरे लब हों ऐसा कब होगा| शहरयार
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गा रही कविता युगों से मुग्ध हो!
आज एक बार फिर से मैं राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी ने ओज और शृंगार दोनों प्रकार की कविताओं के प्रतिमान रचे हैं| दिनकर जी की बहुत सी कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह दिनकर जी…