-
अना ने किसी की!
कचोके देती रहीं ग़ुर्बतें मुझे लेकिन, मिरी अना ने किसी की तरफ़ नहीं देखा| मंज़र भोपाली
-
किसी ने मुड़ के!
क़लक़ था सब को समुंदर की बे-क़रारी का, किसी ने मुड़ के नदी की तरफ़ नहीं देखा| मंज़र भोपाली
-
श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-20
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज बीसवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा। इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…