वहशत का पैग़ाम है!

ऐ दिल वालो घर से निकलो देता दावत-ए-आम है चाँद,

शहरों शहरों क़रियों क़रियों वहशत का पैग़ाम है चाँद|

                 इब्न-ए-इंशा

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