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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-19
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज उन्नीसवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा| इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…
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लिखता है ग़म की बात!
लिखता है ग़म की बात मसर्रत के मूड में, मख़्सूस है ये तर्ज़ फ़क़त ‘कैफ़’ ही के साथ. कैफ़ भोपाली
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हिकायतें न सुना!
शा’इर हिकायतें न सुना वस्ल ओ इश्क़ की, इतना बड़ा मज़ाक़ न कर शाइरी के साथ. कैफ़ भोपाली
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सड़कों का हुस्न है!
शाइस्तगान-ए-शहर मुझे ख़्वाह कुछ कहें, सड़कों का हुस्न है मिरी आवारगी के साथ. कैफ़ भोपाली
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अपना यही अमल है!
चलते हैं बच के शैख़-ओ-बरहमन के साए से, अपना यही अमल है बुरे आदमी के साथ. कैफ़ भोपाली
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कुटिया में कौन आएगा
कुटिया में कौन आएगा इस तीरगी के साथ, अब ये किवाड़ बंद करो ख़ामुशी के साथ. कैफ़ भोपाली
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श्रीकृष्ण शर्मा ‘अशेष’ की रचनायें-18
मेरी उपलब्ध रचनाएं यहाँ शेयर करने का आज अठारहवां दिन है, इस प्रकार जहाँ इन सबको, जितनी उपलब्ध हैं, एक साथ शेयर कर लूंगा, इसके लिए मैं अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में जिस क्रम में कविताएं पहले शेयर की हैं, उसी क्रम में उनको लेकर यहाँ पुनः एक साथ शेयर कर रहा हूँ। जैसा मैंने पहले…
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दिल आ जाए तो
नादानी और मजबूरी में यारो कुछ तो फ़र्क़ करो, इक बे-बस इंसान करे क्या टूट के दिल आ जाए तो. अंदलीब शादानी