सखियों से कब सखियाँ अपने जी के भेद छुपाती हैं,
हम से नहीं तो उस से कह दे करता कहाँ कलाम है चाँद|
इब्न-ए-इंशा
A sky full of cotton beads like clouds
सखियों से कब सखियाँ अपने जी के भेद छुपाती हैं,
हम से नहीं तो उस से कह दे करता कहाँ कलाम है चाँद|
इब्न-ए-इंशा
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