तमन्ना कौन करे!

जब दिल था शगुफ़्ता गुल की तरह टहनी काँटा सी चुभती थी,

अब एक फ़सुर्दा दिल ले कर गुलशन की तमन्ना कौन करे|

                    आनंद नारायण मुल्ला

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