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दिल में उतर गया वो!
ख़ुशी की रुत हो कि ग़म का मौसम नज़र उसे ढूँडती है हर दम, वो बू-ए-गुल था कि नग़्मा-ए-जाँ मिरे तो दिल में उतर गया वो| नासिर काज़मी
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हैरान कर गया वो!
गए दिनों का सुराग़ ले कर किधर से आया किधर गया वो, अजीब मानूस अजनबी था मुझे तो हैरान कर गया वो| नासिर काज़मी
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आज तुम से मिल सकूँगा, था मुझे विश्वास!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में अपना श्रेष्ठ योगदान करने वाले कवि स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय जी की एक प्रमुख उपलब्धि यह भी थी कि उन्होंने उस समय के श्रेष्ठ कवियों को तारसप्तक तथा तीन सप्तकों के माध्यम से…
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ख़ता है कि नहीं है!
सच है कि मोहब्बत में हमें मौत ने मारा, कुछ इसमें तुम्हारी भी ख़ता है कि नहीं है| कैफ़ भोपाली
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जाने तिरे क़दमों की!
सुनता हूँ इक आहट सी बराबर शब-ए-वादा, जाने तिरे क़दमों की सदा है कि नहीं है| कैफ़ भोपाली
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दवा है कि नहीं है!
बीमार-ए-मोहब्बत की दवा है कि नहीं है, मेरे किसी पहलू में क़ज़ा* है कि नहीं है| *Death, Luck कैफ़ भोपाली
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दर्द-ए-सर गया!
इस दिल के टूटने का मुझे कोई ग़म नहीं, अच्छा हुआ कि पाप कटा दर्द-ए-सर गया| कैफ़ भोपाली
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तुमने वो काँटे चुभोए हैं
जान-ए-बहार तुमने वो काँटे चुभोए हैं, मैं हर गुल-ए-शगुफ़्ता को छूने से डर गया| कैफ़ भोपाली