Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 13th Feb 2024

    तेरी राहों में मिरे!

    इस जनम में तो कभी मैं न उधर से गुज़रा, तेरी राहों में मिरे नक़्श-ए-कफ़-ए-पा कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 13th Feb 2024

    बज़्म में तन्हा कैसे!

    आप भी अहल-ए-ख़िरद* अहल-ए-जुनूँ** थे मौजूद, लुट गए हम भी तिरी बज़्म में तन्हा कैसे| *बुद्धिमत्ता, **जोश             कृष्ण बिहारी नूर

  • 13th Feb 2024

    खा गए धोका कैसे!

    देखी होंटों की हँसी ज़ख़्म न देखे दिल के, आप दुनिया की तरफ़ खा गए धोका कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 13th Feb 2024

    इसी तट पर!

    आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी नवगीत की वरिष्ठ कवियित्री सुश्री शांति सुमन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है सुश्री शांति सुमन जी की यह कविता – अपरिचय का आकाश तोड़ेंएक लंबा अतराल जोड़ें कहाँ बहुत मिलते हैं, फुरसत…

  • 12th Feb 2024

    दोस्तों शुक्र करो!

    दोस्तों शुक्र करो मुझ से मुलाक़ात हुई, ये न पूछो कि लुटी है मिरी दुनिया कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    ग़ैरों पे भरोसा कैसे!

    मुझ को ख़ुद पर भी भरोसा नहीं होने पाता, लोग कर लेते हैं ग़ैरों पे भरोसा कैसे|            कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    मुड़ के मेरी ही तरफ़!

    मुझ से जब तर्क-ए-तअल्लुक़ का किया अहद तो फिर, मुड़ के मेरी ही तरफ़ आप ने देखा कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    ख़ुद से मैं तन्हा कैसे!

    हर घड़ी तेरे ख़यालों में घिरा रहता हूँ, मिलना चाहूँ तो मिलूँ ख़ुद से मैं तन्हा कैसे|              कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    तेज़ था ठहरा कैसे!

    रुक गया आँख से बहता हुआ दरिया कैसे, ग़म का तूफ़ाँ तो बहुत तेज़ था ठहरा कैसे|               कृष्ण बिहारी नूर

  • 12th Feb 2024

    उसकी खिड़की खुली है!

    आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के प्रसिद्ध आधुनिक कवि श्री अशोक वाजपेयी  जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अशोक वाजपेयी  जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – उसकी खिड़की खुली है,उसके आँगन में गूँज रहा…

←Previous Page
1 … 629 630 631 632 633 … 1,399
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar