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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Sep 2024

    वरना,शि‍खर कौन सा है!

    आज एक बार फिर मैं अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों के अत्यंत लोकप्रिय और श्रेष्ठ कवि रहे स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सरोज जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय मुकुट बिहारी सरोज जी का यह गीत –…

  • 1st Sep 2024

    चुप-चाप अपनी आग!

    चुप-चाप अपनी आग में जलते रहो ‘फ़राज़’,दुनिया तो अर्ज़-ए-हाल से बे-आबरू करे| अहमद फ़राज़

  • 1st Sep 2024

    अब कोई हादसा ही!

    तुझ को भुला के दिल है वो शर्मिंदा-ए-नज़र,अब कोई हादसा ही तिरे रू-ब-रू करे| अहमद फ़राज़

  • 1st Sep 2024

    न कोई आरज़ू करे!

    अब तो ये आरज़ू है कि वो ज़ख़्म खाइए,ता-ज़िंदगी ये दिल न कोई आरज़ू करे| अहमद फ़राज़

  • 1st Sep 2024

    कौन तिरी जुस्तुजू करे!

    तेरे बग़ैर भी तो ग़नीमत है ज़िंदगी,ख़ुद को गँवा के कौन तिरी जुस्तुजू करे| अहमद फ़राज़

  • 1st Sep 2024

    पर दिल ये चाहता है!

    अब तो हमें भी तर्क-ए-मरासिम का दुख नहीं, पर दिल ये चाहता है कि आग़ाज़ तू करे| अहमद फ़राज़

  • 1st Sep 2024

    दिल को लहू करे!

    क्या ऐसे कम-सुख़न से कोई गुफ़्तुगू करे,जो मुस्तक़िल सुकूत से दिल को लहू करे| अहमद फ़राज़

  • 1st Sep 2024

    देखो तो कितने शहर!

    रोते हो इक जज़ीरा-ए-जाँ को ‘फ़राज़’ तुम,देखो तो कितने शहर समुंदर के हो गए| अहमद फ़राज़

  • 1st Sep 2024

    पुरानी पड़ी बीन पर राग नूतन!

    आज एक बार फिर मैं अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों के अत्यंत लोकप्रिय और श्रेष्ठ कवि रहे स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत –…

  • 31st Aug 2024

    अब के न इंतिज़ार!

    अब के न इंतिज़ार करें चारागर कि हम,अब के गए तो कू-ए-सितमगर के हो गए| अहमद फ़राज़

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