वो आते हैं तो चेहरे पर!

ख़िलाफ़-ए-मस्लहत मैं भी समझता हूँ मगर नासेह,

वो आते हैं तो चेहरे पर तग़य्युर आ ही जाता है|

               जोश मलीहाबादी

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