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किया था अह्द जब!
किया था अह्द जब लम्हों में हम ने, तो सारी उम्र ईफ़ा* क्यूँ करें हम| *प्रतिज्ञा पालन जौन एलिया
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क्या बात करें?
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत – घर की बात करें वे जो घर वाले हैंहम फुटपाथों पर बैठे क्या…
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वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी!
वफ़ा इख़्लास क़ुर्बानी मोहब्बत, अब इन लफ़्ज़ों का पीछा क्यूँ करें हम| जौन एलिया
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बहुत दिनों तक!
आज एक बार फिर से मैं, श्रेष्ठ हिन्दी कवि स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की यह कविता – पृथ्वी हिलेगी नहीं इस बारधधकेगी भी नहींडूब जाएगी अपने ही पानी में…
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तबस्सुम आ ही जाता है
समझती हैं मआल-ए-गुल मगर क्या ज़ोर-ए-फ़ितरत है, सहर होते ही कलियों को तबस्सुम आ ही जाता है| जोश मलीहाबादी