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अनजाने चुपचाप!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार अज्ञेय जी द्वारा संपादित प्रमुख काव्य संकलन ‘तारसप्तक’ में भी शामिल कवि स्वर्गीय नेमिचन्द्र जैन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय नेमिचन्द्र जैन जी की यह कविता – अनजाने…
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तहख़ाने लगे हैं!
एक क़ब्रिस्तान में घर मिल रहा है,जिसमें तहख़ानों में तहख़ाने लगे हैं| दुष्यंत कुमार
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मेघ मल्लार!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार अज्ञेय जी द्वारा संपादित प्रमुख काव्य संकलन ‘तारसप्तक’ में भी शामिल कवि स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय प्रभाकर माचवे जी की यह कविता – मालव…
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और लहजा भी गया!
साथ ‘ग़ालिब’ के गई फ़िक्र की गहराई भी, और लहजा भी गया ‘मीर-तक़ी-मीर’ के साथ| राजेश रेड्डी
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किसी ज़ंजीर के साथ!
आदमी ही के बनाए हुए ज़िंदाँ हैं ये सब, कोई पैदा नहीं होता किसी ज़ंजीर के साथ| राजेश रेड्डी