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ओ मेरे विशेषण!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार तथा अज्ञेय जी द्वारा संपादित प्रमुख काव्य संकलन ‘तारसप्तक’ में भी शामिल कवि स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत भूषण अग्रवाल जी की यह…
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अँधेरी कोठरी खोलें!
चलो, अब यादगारों की अँधेरी कोठरी खोलेंकम-अज-कम एक वो चेहरा तो पहचाना हुआ होगा दुष्यंत कुमार
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सिर्फ़ गूँगे और बहरे!
यहाँ तो सिर्फ़ गूँगे और बहरे लोग बसते हैं,ख़ुदा जाने वहाँ पर किस तरह जलसा हुआ होगा| दुष्यंत कुमार
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ऐसा हुआ होगा!
कई फ़ाक़े बिता कर मर गया जो उसके बारे में,वो सब कहते हैं अब, ऐसा नहीं,ऐसा हुआ होगा| दुष्यंत कुमार
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कोई हाँका हुआ होगा!
तुम्हारे शहर में ये शोर सुन-सुन कर तो लगता है,कि इंसानों के जंगल में कोई हाँका हुआ होगा| दुष्यंत कुमार
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वहाँ पर क्या हुआ होगा
ग़ज़ब ये है कि अपनी मौत की आहट नहीं सुनते,वो सब के सब परीशाँ हैं वहाँ पर क्या हुआ होगा| दुष्यंत कुमार