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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Feb 2024

    तुम्हीं हो क्या बन्धु वह!

    आज मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार तथा तारसप्तक और अन्य सप्तकों के माध्यम से अनेक कवियों को बड़े आधार पर सामने वाले स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय…

  • 23rd Feb 2024

    देख चुका हूँ पहले भी!

    गो देख चुका हूँ पहले भी नज़्ज़ारा दरिया-नोशी* का, एक और सला-ए-आम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| *OverDrinking क़तील शिफ़ाई

  • 23rd Feb 2024

    देख सितारों के मोती!

    वो देख सितारों के मोती हर आन बिखरते जाते हैं, अफ़्लाक* पे है कोहराम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| *Sky क़तील शिफ़ाई

  • 23rd Feb 2024

    रात गुज़रने वाली है!

    इक जाम खनकता जाम कि साक़ी रात गुज़रने वाली है, इक होश-रुबा इनआ‘म कि साक़ी रात गुज़रने वाली है| क़तील शिफ़ाई

  • 23rd Feb 2024

    पागल नहीं होते!

    उश्शाक़* के मानिंद कई अहल-ए-हवस भी, पागल तो नज़र आते हैं पागल नहीं होते| *आशिक़ अहमद फ़राज़

  • 23rd Feb 2024

    ओझल नहीं होते!

    कैसे ही तलातुम हों मगर क़ुल्ज़ुम-ए-जाँ में, कुछ याद-जज़ीरे हैं कि ओझल नहीं होते| अहमद फ़राज़

  • 23rd Feb 2024

    जल-थल नहीं होते!

    शाइस्तगी-ए-ग़म* के सबब आँखों के सहरा, नमनाक तो हो जाते हैं जल-थल नहीं होते| *दुख सहने की सुशीलता अहमद फ़राज़

  • 23rd Feb 2024

    चाँदनी!

    आज मैं, हिन्दी के श्रेष्ठ रचनाकार तथा अज्ञेय जी द्वारा संपादित प्रमुख काव्य संकलन ‘तारसप्तक’ में भी शामिल कवि स्वर्गीय राम विलास शर्मा जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| इनकी रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय राम विलास शर्मा जी की यह कविता – चांदी की झीनी…

  • 22nd Feb 2024

    कुछ मुश्किलें ऐसी हैं!

    कुछ मुश्किलें ऐसी हैं कि आसाँ नहीं होतीं, कुछ ऐसे मुअम्मे हैं कभी हल नहीं होते| अहमद फ़राज़

  • 22nd Feb 2024

    करिश्मे भी अजब हैं!

    अंदर की फ़ज़ाओं के करिश्मे भी अजब हैं, मेंह टूट के बरसे भी तो बादल नहीं होते| अहमद फ़राज़

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