जल-थल नहीं होते!

शाइस्तगी-ए-ग़म* के सबब आँखों के सहरा,

नमनाक तो हो जाते हैं जल-थल नहीं होते|

*दुख सहने की सुशीलता

अहमद फ़राज़

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