गए दिनों को बुला रहा

शिकस्ता-पा राह में खड़ा हूँ गए दिनों को बुला रहा हूँ,

जो क़ाफ़िला मेरा हम-सफ़र था मिसाल-ए-गर्द-ए-सफ़र गया वो|

                     नासिर काज़मी

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