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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Oct 2023

    चाल बला की बाँकी है!

    मुख पर रूप से धूप का आलम बाल अँधेरी शब की मिसाल, आँख नशीली बात रसीली चाल बला की बाँकी है| इब्न-ए-इंशा

  • 11th Oct 2023

    देवी हिन्दोस्ताँ की है!

    आज मगर इक नार को देखा जाने ये नार कहाँ की है, मिस्र की मूरत चीन की गुड़िया देवी हिन्दोस्ताँ की है| इब्न-ए-इंशा

  • 11th Oct 2023

    हाँ यही रीत जहाँ की है

    जल्वा-नुमाई बे-परवाई हाँ यही रीत जहाँ की है, कब कोई लड़की मन का दरीचा खोल के बाहर झाँकी है| इब्न-ए-इंशा

  • 11th Oct 2023

    अपना गुज़ारा होता है!

    दफ़्तर से उठे कैफ़े में गए कुछ शेर कहे कुछ कॉफ़ी पी, पूछो जो मआश* का ‘इंशा’-जी यूँ अपना गुज़ारा होता है| *जीविका इब्न-ए-इंशा

  • 11th Oct 2023

    ऐ बंजारो हम लोग चले!

    हम दिल को लिए हर देस फिरे इस जिंस के गाहक मिल न सके, ऐ बंजारो हम लोग चले हम को तो ख़सारा* होता है| *Loss इब्न-ए-इंशा

  • 11th Oct 2023

    सुब्ह का तारा होता है!

    कटने लगीं रातें आँखों में देखा नहीं पलकों पर अक्सर, या शाम-ए-ग़रीबाँ का जुगनू या सुब्ह का तारा होता है| इब्न-ए-इंशा

  • 11th Oct 2023

    उनका इशारा होता है!

    हम उनसे अगर मिल बैठे हैं क्या दोष हमारा होता है, कुछ अपनी जसारत होती है कुछ उनका इशारा होता है| इब्न-ए-इंशा

  • 11th Oct 2023

    प्रश्न-वन के देवता!

    आज एक बार फिर से मैं देश के श्रेष्ठ गीत कवि और कुशल मंच संचालक  श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत – ओ, कॅंटीले प्रश्न – वन…

  • 10th Oct 2023

    गले से लगाऊँ मैं!

    उस जैसा नाम रख के अगर आए मौत भी, हँस कर उसे ‘क़तील’ गले से लगाऊँ मैं| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Oct 2023

    ज़मीं को सजाऊँ मैं!

    उतरा है बाम से कोई इल्हाम* की तरह, जी चाहता है सारी ज़मीं को सजाऊँ मैं| *ईश्वरीय प्रेरणा क़तील शिफ़ाई

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