हाँ यही रीत जहाँ की है

जल्वा-नुमाई बे-परवाई हाँ यही रीत जहाँ की है,

कब कोई लड़की मन का दरीचा खोल के बाहर झाँकी है|

इब्न-ए-इंशा

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