अपना गुज़ारा होता है!

दफ़्तर से उठे कैफ़े में गए कुछ शेर कहे कुछ कॉफ़ी पी,

पूछो जो मआश* का ‘इंशा’-जी यूँ अपना गुज़ारा होता है|

*जीविका

इब्न-ए-इंशा

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