सुब्ह का तारा होता है!

कटने लगीं रातें आँखों में देखा नहीं पलकों पर अक्सर,

या शाम-ए-ग़रीबाँ का जुगनू या सुब्ह का तारा होता है|

इब्न-ए-इंशा

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