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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th Oct 2023

    तुझे आज़माऊँ मैं!

    इक शब भी वस्ल* की न मिरा साथ दे सकी, अहद-ए-फ़िराक़** आ कि तुझे आज़माऊँ मैं| *मिलन की रात, **ज़ुदाई का इरादा क़तील शिफ़ाई

  • 10th Oct 2023

    कहीं मर न जाऊँ मैं!

    सुनता हूँ अब किसी से वफ़ा कर रहा है वो, ऐ ज़िंदगी ख़ुशी से कहीं मर न जाऊँ मैं| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Oct 2023

    हाथ अपना जलाऊँ मैं!

    दिल तो जला किया है वो शो‘ला सा आदमी, अब किस को छू के हाथ भी अपना जलाऊँ मैं| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Oct 2023

    दो मुझ को बद-दुआ!

    यारो कहाँ तक और मोहब्बत निभाऊँ मैं, दो मुझ को बद-दुआ’ कि उसे भूल जाऊँ मैं| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Oct 2023

    कन-कन तुम्हें जी कर!

    आज एक बार फिर से मैं देश के प्रसिद्ध साहित्यकार और धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का यह गीत – अतल गहराई तकतुम्ही…

  • 9th Oct 2023

    ये ज़माना भी..

    न रहे जब वो भले दिन भी ‘क़तील’, ये ज़माना भी गुज़र जाएगा| क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    मुझ को खोकर वो!

    काएनात उसकी मिरी ज़ात में है, मुझ को खोकर वो किसे पाएगा| क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    उसे याद बहुत आएँगे!

    हम उसे याद बहुत आएँगे, जब उसे भी कोई ठुकराएगा| क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    कौन आकर हमें!

    तू न होगी तो फिर ऐ शाम-ए-फ़िराक़*, कौन आकर हमें बहलाएगा| *Departing क़तील शिफ़ाई

  • 9th Oct 2023

    झूटी भी क़सम खाएगा!

    ए‘तिबार उसका हमेशा करना, वो तो झूटी भी क़सम खाएगा| क़तील शिफ़ाई

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