तुझे आज़माऊँ मैं!

इक शब भी वस्ल* की न मिरा साथ दे सकी,

अहद-ए-फ़िराक़** आ कि तुझे आज़माऊँ मैं|

*मिलन की रात, **ज़ुदाई का इरादा

क़तील शिफ़ाई

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