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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Oct 2023

    रवाँ है छोटी सी कश्ती!

    रवाँ है छोटी सी कश्ती हवाओं के रुख़ पर, नदी के साज़ पे मल्लाह गीत गाता है| तुम्हारा जिस्म हर इक लहर के झकोले से, मिरी खुली हुई बाहोँ में झूल जाता है| तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं| साहिर लुधियानवी

  • 25th Oct 2023

    इतनी बड़ी भीड़ में केवल!  

    आज एक बार फिर मैं अपने समय में काव्य मंचों पर अपनी कविताओं और गीतों के माध्यम से धूम मचाने वाले स्वर्गीय शिशुपाल सिंह निर्धन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो अधूरा ही उपलब्ध हो पाया है| निर्धन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है…

  • 24th Oct 2023

    आहट से झेंपती डरती!

    तुम आ रही हो ज़माने की आँख से बच कर| नज़र झुकाए हुए और बदन चुराए हुए, ख़ुद अपने क़दमों की आहट से झेंपती डरती| ख़ुद अपने साए की जुम्बिश से ख़ौफ़ खाए हुए, तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं| साहिर लुधियानवी

  • 24th Oct 2023

    दुआएँ क़ुबूल हो जाएँ!

    धड़कते दिल से लरज़ती हुई निगाहों से, हुज़ूर-ए-ग़ैब में नन्ही सी इल्तिजा की थी| कि आरज़ू के कँवल खिल के फूल हो जाएँ, दिल-ओ-नज़र की दुआएँ क़ुबूल हो जाएँ| साहिर लुधियानवी

  • 24th Oct 2023

    यही फ़ज़ा थी यही रुत!

    न जाने कितनी कशाकश से कितनी काविश से, ये सोते जागते लम्हे चुरा के लाए हैं| यही फ़ज़ा थी यही रुत यही ज़माना था, यहीं से हमने मोहब्बत की इब्तिदा की थी| साहिर लुधियानवी

  • 24th Oct 2023

    कहने सुनने आए हैं!

    वो पेड़ जिनके तले हम पनाह लेते थे, खड़े हैं आज भी साकित किसी अमीं की तरह| उन्ही के साए में फिर आज दो धड़कते दिल, ख़मोश होंटों से कुछ कहने सुनने आए हैं| साहिर लुधियानवी

  • 24th Oct 2023

    कभी यक़ीं की तरह!

    फ़ज़ा में घुल से गए हैं उफ़ुक़ के नर्म ख़ुतूत, ज़मीं हसीन है ख़्वाबों की सरज़मीं की तरह| तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैं, कभी गुमान की सूरत कभी यक़ीं की तरह| साहिर लुधियानवी

  • 24th Oct 2023

    हसीन फूल हसीं पतियाँ

    जवान रात के सीने पे दूधिया आँचल, मचल रहा है किसी ख़ाब-ए-मर्मरीं की तरह| हसीन फूल हसीं पतियाँ हसीं शाख़ें, लचक रही हैं किसी जिस्म-ए-नाज़नीं की तरह| साहिर लुधियानवी

  • 24th Oct 2023

    रंग है वो उसका है!

    मेरे अल्फ़ाज़ में जो रंग है वो उसका है, मेरे एहसास में जो है वो फ़ज़ा उसकी है| जावेद अख़्तर

  • 24th Oct 2023

    कवि आज सुना वह गान रे!  

    आज एक बार फिर मैं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, विख्यात राजनेता और वक्ता तथा हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| वाजपेयी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की यह…

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