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पालोलिम, कोला बीच!
मैं यह बताना चाहूँगा कि पिछले सप्ताह गोवा में ही पालोलिम बीच जाने का प्रोग्राम तीसरी बार बन गया| बड़ा बेटा लंदन से आया हुआ है सो उसके लिए कम समय में भारत के अधिक सुंदर और महत्वपूर्ण स्थानों को फिर से देख लेना महत्वपूर्ण है| ‘पालोलिम बीच’ हम पहले भी दो बार उसके साथ…
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कोलाहल के आँगन!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि और गीतकार स्वर्गीय हरीश भादानी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी रचनाएं मैंने शायद पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरीश भादानी जी की यह रचना – दिन ढलते-ढलतेकोलाहल के आंगनसन्नाटारख गई हवा दिन ढलते-ढलते दो छते कंगूरे परदूध का कटोरा थाधुंधवाती चिमनी मेंउलटा…