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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Nov 2023

    पालोलिम, कोला बीच!

    मैं यह बताना चाहूँगा कि पिछले सप्ताह गोवा में ही पालोलिम बीच जाने का प्रोग्राम तीसरी बार बन गया| बड़ा बेटा लंदन से आया हुआ है सो उसके लिए कम समय में भारत के अधिक सुंदर और महत्वपूर्ण स्थानों को फिर से देख लेना महत्वपूर्ण है| ‘पालोलिम बीच’ हम पहले भी दो बार उसके साथ…

  • 19th Nov 2023

    मुद्दआ मिलता नहीं!

    मा‘नी-ए-दिल का करे इज़हार ‘अकबर’ किस तरह, लफ़्ज़ मौज़ूँ बहर-ए-कश्फ़-ए-मुद्दआ मिलता नहीं|     अकबर इलाहाबादी

  • 19th Nov 2023

    चाँदनी रातें बहार!

    चाँदनी रातें बहार अपनी दिखाती हैं तो क्या, बे तिरे मुझ को तो लुत्फ़ ऐ मह-लक़ा* मिलता नहीं| *खूबसूरती अकबर इलाहाबादी

  • 19th Nov 2023

    आश्ना मिलता नहीं!

    चल बसे वो दिन कि यारों से भरी थी अंजुमन, हाए अफ़्सोस आज सूरत-आश्ना मिलता नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 19th Nov 2023

    ख़ुदा मिलता नहीं!

    अहल-ए-ज़ाहिर जिस क़दर चाहें करें बहस-ओ-जिदाल, मैं ये समझा हूँ ख़ुदी में तो ख़ुदा मिलता नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 19th Nov 2023

    लोग कहते हैं कि!

    लोग कहते हैं कि बद-नामी से बचना चाहिए, कह दो बे उसके जवानी का मज़ा मिलता नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 19th Nov 2023

    कोलाहल के आँगन!

    आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि और गीतकार स्वर्गीय हरीश भादानी जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी रचनाएं मैंने शायद पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरीश भादानी जी की यह रचना – दिन ढलते-ढलतेकोलाहल के आंगनसन्नाटारख गई हवा          दिन ढलते-ढलते दो छते कंगूरे परदूध का कटोरा थाधुंधवाती चिमनी मेंउलटा…

  • 18th Nov 2023

    ज़िंदगी है तल्ख़!

    जिस पे दिल आया है वो शीरीं-अदा मिलता नहीं, ज़िंदगी है तल्ख़ जीने का मज़ा मिलता नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 18th Nov 2023

    उनकी क़ब्रों का भी!

    ज़िंदगानी का मज़ा मिलता था जिनकी बज़्म में, उनकी क़ब्रों का भी अब मुझको पता मिलता नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 18th Nov 2023

    दर्द-आश्ना मिलता नहीं

    ग़ाफ़िलों को क्या सुनाऊँ दास्तान-ए-इश्क़-ए-यार, सुनने वाले मिलते हैं दर्द-आश्ना मिलता नहीं| अकबर इलाहाबादी

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