-
न शिकायत करे कोई!
लब सी दिये हैं ता न शिकायत करे कोई,लेकिन हर एक ज़ख़्म के मूँह में ज़बाँ है आज| अली सरदार जाफ़री
-
पिघला हुआ रगों में!
एक जू-ए-दर्द दिल से जिगर तक रवाँ है आज,पिघला हुआ रगों में इक आतिश-फ़िशाँ है आज| अली सरदार जाफ़री
-
वो चमकती है जहाँ!
और अब मेरे तसव्वुर का उफ़क़ रोशन है,वो चमकती है जहाँ ग़म का सितारा बन कर| अली सरदार जाफ़री
-
उड़ गई वो मेरे!
शोला-ए-इश्क़ सर-ए-अर्श को जब छूने लगा,उड़ गई वो मेरे सीने से शरारा बन कर| अली सरदार जाफ़री
-
धूम मचा दी उसने!
महफ़िल-ए-शौक़ में इक धूम मचा दी उसने,ख़ल्वत-ए-दिल में रही अन्जुमन-आरा बन कर| अली सरदार जाफ़री
-
रंग और नूर का!
मेरी वादी में वो इक दिन यूँ ही आ निकली थी,रंग और नूर का बहता हुआ धारा बन कर| अली सरदार जाफ़री
-
आदमी खोखले हैं!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि और रूबाई सम्राट के नाम से विख्यात श्री उदयभानु हंस जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| हंस जी की कुछ सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयभानु हंस जी की यह ग़ज़ल – आदमी खोखले हैं पूस के बादल की तरह,शहर…
-
वफ़ा का नहीं होता!
दिल तर्क-ए-तअ‘ल्लुक़ पे भी आमादा नहीं है, और हक़ भी अदा इससे वफ़ा का नहीं होता| शहरयार