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जो करता है मोहब्बत!
मिरी बर्बादियाँ भी देख लीं तुम ने जहाँ वालो, जो करता है मोहब्बत वो युंही नाकाम होता है| राजा मेहदी अली ख़ाँ
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कहाँ आराम होता है!
न दिल में चैन है हमको न रातों को क़रार आए, बता दे कोई दुनिया में कहाँ आराम होता है| राजा मेहदी अली ख़ाँ
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इक पैग़ाम होता है!
हमेशा के लिए दुनिया में दो दिल मिल नहीं सकते, नज़र मिलना जुदाई का ही इक पैग़ाम होता है| राजा मेहदी अली ख़ाँ
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यही अंजाम होता है!
मोहब्बत करने वालों का यही अंजाम होता है, तड़पना उन की क़िस्मत में तो सुब्ह-ओ-शाम होता है| राजा मेहदी अली ख़ाँ
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चेहरे!
आज मैं हिन्दी के एक विख्यात साहित्यकार श्री राम दरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री राम दरश मिश्र जी की यह कविता – आपके संगमरमरी मकान का दरवाज़ापारदर्शी शीशे का हैउसमें से बाहर के…