Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 10th Nov 2023

    जो करता है मोहब्बत!

    मिरी बर्बादियाँ भी देख लीं तुम ने जहाँ वालो, जो करता है मोहब्बत वो युंही नाकाम होता है| राजा मेहदी अली ख़ाँ

  • 10th Nov 2023

    कहाँ आराम होता है!

    न दिल में चैन है हमको न रातों को क़रार आए, बता दे कोई दुनिया में कहाँ आराम होता है| राजा मेहदी अली ख़ाँ

  • 10th Nov 2023

    इक पैग़ाम होता है!

    हमेशा के लिए दुनिया में दो दिल मिल नहीं सकते, नज़र मिलना जुदाई का ही इक पैग़ाम होता है| राजा मेहदी अली ख़ाँ

  • 10th Nov 2023

    यही अंजाम होता है!

    मोहब्बत करने वालों का यही अंजाम होता है, तड़पना उन की क़िस्मत में तो सुब्ह-ओ-शाम होता है| राजा मेहदी अली ख़ाँ

  • 10th Nov 2023

    चेहरे!

    आज मैं हिन्दी के एक विख्यात साहित्यकार श्री राम दरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री राम दरश मिश्र जी की यह कविता – आपके संगमरमरी मकान का दरवाज़ापारदर्शी शीशे का हैउसमें से बाहर के…

  • 9th Nov 2023

    तुम जो ग़ुल मचाते हो!

    कहा जो हम ने ”हमें दर से क्यूँ उठाते हो”, कहा कि ”इस लिए तुम याँ जो ग़ुल मचाते हो”| नज़ीर अकबराबादी

  • 9th Nov 2023

    ऐसे दीवाने को हम!

    बाग़ में लगता नहीं सहरा से घबराता है दिल, अब कहाँ ले जा के बैठें ऐसे दीवाने को हम| नज़ीर अकबराबादी

  • 9th Nov 2023

    आब और दाने को हम!

    हम को फँसना था क़फ़स में क्या गिला सय्याद का, बस तरसते ही रहे हैं आब और दाने को हम| नज़ीर अकबराबादी

  • 9th Nov 2023

    ग़म खाने को हम!

    क्यूँ नहीं लेता हमारी तू ख़बर ऐ बे-ख़बर, क्या तिरे आशिक़ हुए थे दर्द-ओ-ग़म खाने को हम| नज़ीर अकबराबादी

  • 9th Nov 2023

    दिल में आता है लगा दें

    मय भी है मीना भी है साग़र भी है साक़ी नहीं, दिल में आता है लगा दें आग मय-ख़ाने को हम| नज़ीर अकबराबादी

←Previous Page
1 … 689 690 691 692 693 … 1,399
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar