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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th May 2024

    कहलाएँगे आज़ाद सब

    शहर के हाकिम का ये फ़रमान है, क़ैद में कहलाएँगे आज़ाद सब| जावेद अख़्तर

  • 27th May 2024

    अदाकारी में हैं उस्ताद

    सब को दा‘वा-ए-वफ़ा सब को यक़ीं, इस अदाकारी में हैं उस्ताद सब| जावेद अख़्तर

  • 27th May 2024

    भूल के सब रंजिशें!

    भूल के सब रंजिशें सब एक हैं, मैं बताऊँ सब को होगा याद सब| जावेद अख़्तर

  • 27th May 2024

    यहाँ सब अजनबी!

    सब की ख़ातिर हैं यहाँ सब अजनबी, और कहने को हैं घर आबाद सब| जावेद अख़्तर

  • 27th May 2024

    ये तसल्ली है कि!

    ये तसल्ली है कि हैं नाशाद सब, मैं अकेला ही नहीं बर्बाद सब| जावेद अख़्तर

  • 27th May 2024

    रत्नदीप!

    आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध कवि स्वर्गीय श्रीकान्त वर्मा जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय श्रीकान्त वर्मा जी की यह कविता – इस नीले सिंधु तीर, एक शामगीला एकान्त देखआँख डबडबाई थीऔर व्यथा की नन्ही जल चिड़ियामुझसे कुछ…

  • 26th May 2024

    जितने दिन लोगों ने!

    इतने दिन एहसान किया दीवानों पर, जितने दिन लोगों ने साथ निभाया है| साहिर लुधियानवी

  • 26th May 2024

    दिल ही काम आया है!

    अव्वल अव्वल जिस दिल ने बर्बाद किया, आख़िर आख़िर वो दिल ही काम आया है| साहिर लुधियानवी

  • 26th May 2024

    कौन हमें ले आया है!

    पैदाइश के दिन से मौत की ज़द में हैं, इस मक़्तल में कौन हमें ले आया है| साहिर लुधियानवी

  • 26th May 2024

    इंसाँ का ख़ूँ बहाया है!

    झूट तो क़ातिल ठहरा इस का क्या रोना, सच ने भी इंसाँ का ख़ूँ बहाया है| साहिर लुधियानवी

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