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टकराव बहुत!
होने लगे हैं रस्ते रस्ते, आपस के टकराव बहुत, एक साथ के चलने वालों में भी है अलगाव बहुत| क़ैसर शमीम
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चढ़ गया दिल पर इशारों का नशा!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध हिन्दी गीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| गर्ग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का यह गीत – उनके कहने से गुनहगार हुए बैठे हैं,उनकी ख़ातिर ही…
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हर एक सुनता था!
वो चीख़ उभरी बड़ी देर गूँजी डूब गई, हर एक सुनता था लेकिन कोई हिला भी नहीं| जावेद अख़्तर
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अब गिला भी नहीं!
कभी जो तल्ख़-कलामी थी वो भी ख़त्म हुई, कभी गिला था हमें उन से अब गिला भी नहीं| जावेद अख़्तर
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कभी मिला भी नहीं!
कभी तो बात की उस ने कभी रहा ख़ामोश, कभी तो हँस के मिला और कभी मिला भी नहीं| जावेद अख़्तर
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कुछ हुआ भी नहीं!
कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ, कभी ये लगता है अब तक तो कुछ हुआ भी नहीं| जावेद अख़्तर
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तिरा तो कोई ख़ुदा है!
मैं कब से कितना हूँ तन्हा तुझे पता भी नहीं, तिरा तो कोई ख़ुदा है मिरा ख़ुदा भी नहीं| जावेद अख़्तर
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गत और आगत!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध हिन्दी गीतकार और संपादक श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| राही जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – जाने वाले का दर्द नहीं मिटता परआने वाले का चाव…