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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 29th May 2024

    टकराव बहुत!

    होने लगे हैं रस्ते रस्ते, आपस के टकराव बहुत, एक साथ के चलने वालों में भी है अलगाव बहुत| क़ैसर शमीम

  • 29th May 2024

    चढ़ गया दिल पर इशारों का नशा!

    आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध हिन्दी गीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| गर्ग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शेरजंग गर्ग जी का यह गीत – उनके कहने से गुनहगार हुए बैठे हैं,उनकी ख़ातिर ही…

  • 28th May 2024

    हर एक सुनता था!

    वो चीख़ उभरी बड़ी देर गूँजी डूब गई, हर एक सुनता था लेकिन कोई हिला भी नहीं|    जावेद अख़्तर

  • 28th May 2024

    अब गिला भी नहीं!

    कभी जो तल्ख़-कलामी थी वो भी ख़त्म हुई, कभी गिला था हमें उन से अब गिला भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 28th May 2024

    कभी मिला भी नहीं!

    कभी तो बात की उस ने कभी रहा ख़ामोश, कभी तो हँस के मिला और कभी मिला भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 28th May 2024

    कुछ हुआ भी नहीं!

    कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ, कभी ये लगता है अब तक तो कुछ हुआ भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 28th May 2024

    तिरा तो कोई ख़ुदा है!

    मैं कब से कितना हूँ तन्हा तुझे पता भी नहीं, तिरा तो कोई ख़ुदा है मिरा ख़ुदा भी नहीं| जावेद अख़्तर

  • 28th May 2024

    हम पे जो गुज़री!

    तल्ख़ियाँ कैसे न हों अशआ‘र में, हम पे जो गुज़री हमें है याद सब| जावेद अख़्तर

  • 28th May 2024

    गत और आगत!

    आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध हिन्दी गीतकार और संपादक श्री बालस्वरूप राही जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| राही जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – जाने वाले का दर्द नहीं मिटता परआने वाले का चाव…

  • 27th May 2024

    उस को कब फ़ुर्सत!

    चार लफ़्ज़ों में कहो जो भी कहो, उस को कब फ़ुर्सत सुने फ़रियाद सब| जावेद अख़्तर

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