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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Nov 2023

    सवेरा नहीं होता!

    क्यूँ मेरा मुक़द्दर है उजालों की सियाही, क्यूँ रात के ढलने पे सवेरा नहीं होता| शहरयार

  • 12th Nov 2023

    कभी ठहरा नहीं होता!

    इस मोड़ से आगे भी कोई मोड़ है वर्ना, यूँ मेरे लिए तू कभी ठहरा नहीं होता| शहरयार

  • 12th Nov 2023

    तन्हा नहीं होता!

    ये क्या है मोहब्बत में तो ऐसा नहीं होता, मैं तुझ से जुदा हो के भी तन्हा नहीं होता| शहरयार

  • 12th Nov 2023

    बिछड़ना है तो बिछड़

    बिछड़ना है तो बिछड़ जा इसी दो-राहे पर, कि मोड़ आगे सफ़र में कहीं नहीं आता| शहरयार

  • 12th Nov 2023

    खुले हुए हैं सभी दर!

    ये मेरा दिल है कि मंज़र उजाड़ बस्ती का, खुले हुए हैं सभी दर मकीं नहीं आता| शहरयार

  • 12th Nov 2023

    यक़ीं नहीं आता!

    जो होने वाला है अब उसकी फ़िक्र क्या कीजे, जो हो चुका है उसी पर यक़ीं नहीं आता| शहरयार

  • 12th Nov 2023

    हमने जो भोगा सो गाया!

    आज एक बार फिर मैं अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले  विख्यात गीतकार स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत – हमने…

  • 11th Nov 2023

    वहीं नहीं आता!

    तिरा ख़याल भी तेरी तरह सितमगर है, जहाँ पे चाहिए आना वहीं नहीं आता| शहरयार

  • 11th Nov 2023

    नज़र जो कोई भी!

    नज़र जो कोई भी तुझ सा हसीं नहीं आता, किसी को क्या मुझे ख़ुद भी यक़ीं नहीं आता| शहरयार

  • 11th Nov 2023

    उसी ने रचा है!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी के विख्यात साहित्यकार और धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| भारती जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की यह कविता – नहीं-वह नहीं जो कुछ…

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