हमने जो भोगा सो गाया!

आज एक बार फिर मैं अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले  विख्यात गीतकार स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ|

रंग जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|

लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बलबीर सिंह रंग जी का यह गीत –

हमने जो भोगा सो गाया।
अकथनीयता को दी वाणी,
वाणी को भाषा कल्याणी;
कलम कमण्डल लिये हाथ में,
दर-दर अलख जगाया।
हमने जो भोगा सो गाया।

सहज भाव से किया खुलासा,
आँखों देखा हुआ तमाशा;
कौन करेगा लेखा-जोखा,
क्या खोया क्या पाया?
हमने जो भोगा सो गाया।

पीड़ाओं के परिचायक हैं,
और भला हम किस लायक हैं;
अन्तर्मठ की प्राचीरों में,
अनहद नाद गुँजाया।
हमने जो भोगा सो गाया।

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

                                  ********  

3 responses to “हमने जो भोगा सो गाया!”

  1. नमस्कार 🙏

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  2. Sundar abhiwyakti. Sajha karne hetu dhanywaad|

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