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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Nov 2023

    बा-ख़ुदा मिलता नहीं!

    कश्ती-ए-दिल की इलाही बहर-ए-हस्ती में हो ख़ैर, नाख़ुदा मिलते हैं लेकिन बा-ख़ुदा मिलता नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 18th Nov 2023

    ग़ाफ़िलों के लुत्फ़ को!

    ग़ाफ़िलों के लुत्फ़ को काफ़ी है दुनियावी ख़ुशी, आक़िलों को बे-ग़म-ए-उक़्बा मज़ा मिलता नहीं| ग़ाफ़िलों , आक़िलों – नासमझ, बुद्धिमान अकबर इलाहाबादी

  • 18th Nov 2023

    सिरा मिलता नहीं!

    फ़लसफ़ी को बहस के अंदर ख़ुदा मिलता नहीं, डोर को सुलझा रहा है और सिरा मिलता नहीं| अकबर इलाहाबादी

  • 18th Nov 2023

    पूर्वाभास!

    आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि, नवगीतकार और अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ में शामिल कवि स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की यह रचना – धूप चिड़चिड़ी, हवा बेहया,दिन मटमैलामौसम पर…

  • 17th Nov 2023

    वो दब-दबा वो रौब!

    ज़िन्दानियों *ने तोड़ दिया ज़ुल्म का ग़ुरूर,वो दब-दबा वो रौब-ए-हुकूमत कहाँ है आज|     *Prisoners अली सरदार जाफ़री

  • 17th Nov 2023

    ज़ख़्मों से दिल है चूर!

    आये हैं किस निशात से हम क़त्ल-गाह में,ज़ख़्मों से दिल है चूर नज़र गुल-फ़िशाँ है आज| अली सरदार जाफ़री

  • 17th Nov 2023

    मेरी दास्ताँ है आज!

    हो जाता हूँ शहीद हर अहल-ए-वफ़ा के साथ,हर दास्तान-ए-शौक़ मेरी दास्ताँ है आज| अली सरदार जाफ़री

  • 17th Nov 2023

    जीने का वक़्त है यही!

    जीने का वक़्त है यही मरने का वक़्त है,दिल अपनी ज़िन्दगी से बहुत शादमाँ है आज| अली सरदार जाफ़री

  • 17th Nov 2023

    घेर लिया है हयात को

    तारीकियों ने घेर लिया है हयात को,लेकिन किसी का रू-ए-हसीं दर्मियाँ है आज| अली सरदार जाफ़री

  • 17th Nov 2023

    मुझसे बात करो मेरे प्रिय – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

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