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आँसू नहीं आएँगे!
ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे, रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे| बशीर बद्र
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वर्त्तमान का निमन्त्रण!
आज एक बार फिर से मैं ओज और शृंगार दोनों धाराओं में अनेक अमर रचनाएं देने वाले देश के राष्ट्रकवि स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| दिनकर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी की यह कविता…
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ज़मीं की धूल भी!
चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है, ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना| निदा फ़ाज़ली
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यह पावस की सांझ रंगीली!
आज एक बार फिर से मैं, हिन्दी गीत के शिखर पुरुष और अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत –…