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पूर्वाभास!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि, नवगीतकार और अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ में शामिल कवि स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की यह रचना – धूप चिड़चिड़ी, हवा बेहया,दिन मटमैलामौसम पर…
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वो दब-दबा वो रौब!
ज़िन्दानियों *ने तोड़ दिया ज़ुल्म का ग़ुरूर,वो दब-दबा वो रौब-ए-हुकूमत कहाँ है आज| *Prisoners अली सरदार जाफ़री
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ज़ख़्मों से दिल है चूर!
आये हैं किस निशात से हम क़त्ल-गाह में,ज़ख़्मों से दिल है चूर नज़र गुल-फ़िशाँ है आज| अली सरदार जाफ़री
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जीने का वक़्त है यही!
जीने का वक़्त है यही मरने का वक़्त है,दिल अपनी ज़िन्दगी से बहुत शादमाँ है आज| अली सरदार जाफ़री
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घेर लिया है हयात को
तारीकियों ने घेर लिया है हयात को,लेकिन किसी का रू-ए-हसीं दर्मियाँ है आज| अली सरदार जाफ़री
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मुझसे बात करो मेरे प्रिय – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…