वो दब-दबा वो रौब!

ज़िन्दानियों *ने तोड़ दिया ज़ुल्म का ग़ुरूर,
वो दब-दबा वो रौब-ए-हुकूमत कहाँ है आज|    

*Prisoners

अली सरदार जाफ़री

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