ज़िन्दानियों *ने तोड़ दिया ज़ुल्म का ग़ुरूर,
वो दब-दबा वो रौब-ए-हुकूमत कहाँ है आज|
*Prisoners
अली सरदार जाफ़री
A sky full of cotton beads like clouds
ज़िन्दानियों *ने तोड़ दिया ज़ुल्म का ग़ुरूर,
वो दब-दबा वो रौब-ए-हुकूमत कहाँ है आज|
*Prisoners
अली सरदार जाफ़री
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