बा-ख़ुदा मिलता नहीं!

कश्ती-ए-दिल की इलाही बहर-ए-हस्ती में हो ख़ैर,

नाख़ुदा मिलते हैं लेकिन बा-ख़ुदा मिलता नहीं|

अकबर इलाहाबादी

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