क्यूँ मेरा मुक़द्दर है उजालों की सियाही,
क्यूँ रात के ढलने पे सवेरा नहीं होता|
शहरयार
- दीपावली की शुभकामनाएं, अगले दो दिन सोशल मीडिया- फेस बुक आदि से तो दूर रहूँगा|
A sky full of cotton beads like clouds
क्यूँ मेरा मुक़द्दर है उजालों की सियाही,
क्यूँ रात के ढलने पे सवेरा नहीं होता|
शहरयार
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