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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th May 2024

    ख़ुशियों का लोभ न दो!

    हम को इन सस्ती ख़ुशियों का लोभ न दो, हम ने सोच समझ कर ग़म अपनाया है| साहिर लुधियानवी

  • 26th May 2024

    बोगनबेलिया!

    आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध कवि और संपादक स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी का यह गीत – ओ पियाआग लगाए बोगनबेलिया! पूनम के आसमान मेंबादल छाया,मन का जैसेसारा दर्द छितराया,सिहर-सिहर उठता…

  • 25th May 2024

    दुख की धूप के आगे!

    सदियों से इंसान ये सुनता आया है, दुख की धूप के आगे सुख का साया है| साहिर लुधियानवी

  • 25th May 2024

    तो सबमें बाँट बराबर!

    जो चाहता है कि इक़बाल हो सिवा तेरा, तो सब में बाँट बराबर से शादमानी को| शहरयार

  • 25th May 2024

    क़ुबूल जो करे!

    बजाए मेरे किसी और का तक़र्रुर हो, क़ुबूल जो करे ख़्वाबों की पासबानी को| शहरयार

  • 25th May 2024

    सियाह रात ने!

    सियाह रात ने बेहाल कर दिया मुझ को, कि तूल दे नहीं पाया किसी कहानी को| शहरयार

  • 25th May 2024

    शदीद प्यास थी!

    शदीद प्यास थी फिर भी छुआ न पानी को, मैं देखता रहा दरिया तिरी रवानी को| शहरयार

  • 25th May 2024

    ये जीवन है!

    मैंने ब्लॉग लेखन प्रारंभ किया था लगभग 7 वर्ष पहले| प्रारंभ में मैंने अपने जीवन, सेवाकाल, कविता की दुनिया, कवि मित्रों आदि के विषय में संस्मरण आदि लिखे, श्रेष्ठ कवियों की कविताएं, शायरी आदि को तो मैं शेयर करता ही रहता हूँ, जब कहीं जाने का अवसर मिलता है तो यात्रा संबंधी अनुभव भी शेयर…

  • 24th May 2024

    तीरगी से समझौता!

    ज़मीं ने कर लिया क्या तीरगी से समझौता, ख़याल छोड़ चुके क्या चराग़ जलने का| शहरयार

  • 24th May 2024

    बिगड़ गया जो ये!

    बिगड़ गया जो ये नक़्शा हवस के हाथों से, तो फिर किसी के सँभाले नहीं सँभलने का| शहरयार

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