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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Nov 2023

    ज़ेहन में बहार भी रख!

    ये ही लहू है शहादत ये ही लहू पानी, ख़िज़ाँ नसीब सही ज़ेहन में बहार भी रख| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    इंतिज़ार भी रख!

    यक़ीन चाँद पे सूरज में ए‘तिबार भी रख, मगर निगाह में थोड़ा सा इंतिज़ार भी रख| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    क्या था वो एक शख़्स!

    अब क्या बताएँ कौन था क्या था वो एक शख़्स, गिनती के चार हर्फ़ों का जो नाम रह गया| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    बहुत सोचता था वो!

    उसका क़ुसूर ये था बहुत सोचता था वो, वो कामयाब हो के भी नाकाम रह गया| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    उठ उठ के मस्जिदों से

    उठ उठ के मस्जिदों से नमाज़ी चले गए, दहशत-गरों के हाथ में इस्लाम रह गया| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    आग़ाज़ ही लिखा गया!

    छोटी थी उम्र और फ़साना तवील था, आग़ाज़ ही लिखा गया अंजाम रह गया| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    कोई काम रह गया!

    कोशिश के बावजूद ये इल्ज़ाम रह गया, हर काम में हमेशा कोई काम रह गया| निदा फ़ाज़ली

  • 3rd Nov 2023

    एक नीला आईना बेठोस!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी में कवियों के कवि कहलाने वाले स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| शमशेर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| शमशेर जी का बिंब विधान बहुत गहन होता है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की यह…

  • 2nd Nov 2023

    छुटती नहीं है जल्दी से!

    ये ज़ख़्म का निशान है जाएगा देर से, छुटती नहीं है जल्दी से मेहंदी लगी हुई|     मुनव्वर राना

  • 2nd Nov 2023

    छूता नहीं है कोई भी!

    साँसों के आने जाने पे चलता है कारोबार, छूता नहीं है कोई भी हाँडी जली हुई| मुनव्वर राना

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