-
आँसुओं से आती है!
हमारी आँखों को मैला तो कर दिया है मगर, मोहब्बतों में चमक आँसुओं से आती है| मुनव्वर राना
-
मुश्किलों से आती है!
हमीं अकेले नहीं जागते हैं रातों में, उसे भी नींद बड़ी मुश्किलों से आती है| मुनव्वर राना
-
ख़बर तुम्हारी भी!
तुम्हारे जिस्म की ख़ुश्बू गुलों से आती है, ख़बर तुम्हारी भी अब दूसरों से आती है| मुनव्वर राना
-
दिल्ली जाने का समय!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की यह कविता – बचपन की मुस्कुराहटों पररखे जा रहे हैं पत्थरगिरवी रखे जा रहे…
-
दुनिया नई पैदा करें!
इस पुरानी बेवफ़ा दुनिया का रोना कब तलक, आइए मिल-जुल के इक दुनिया नई पैदा करें| नज़ीर बनारसी
-
कोई दूसरा धंदा करें!
कीजिएगा रहज़नी कब तक ब-नाम-ए-रहबरी, अब से बेहतर आप कोई दूसरा धंदा करें| नज़ीर बनारसी
-
घर का दरवाज़ा करें!
सुन रहा हूँ कुछ लुटेरे आ गए हैं शहर में, आप जल्दी बंद अपने घर का दरवाज़ा करें| नज़ीर बनारसी
-
दुनिया से हम पर्दा करें!
जी में आता है कि दें पर्दे से पर्दे का जवाब, हम से वो पर्दा करें दुनिया से हम पर्दा करें| नज़ीर बनारसी
-
बाज़ार तो ऊँचा करें!
चढ़ के सूली पर ख़रीदेंगे ख़रीदार आपको, आप अपने हुस्न का बाज़ार तो ऊँचा करें| नज़ीर बनारसी
-
हुस्न तो पैदा करें!
हुस्न ख़ुद आए तवाफ़-ए-इश्क़ करने के लिए, इश्क़ वाले ज़िंदगी में हुस्न तो पैदा करें| नज़ीर बनारसी