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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Jun 2024

    हमी बुनियाद का पत्थर

    हमी बुनियाद का पत्थर हैं लेकिन, हमें घर से निकाला जा रहा है| राहत इंदौरी 

  • 8th Jun 2024

    कोई अल्लाह-वाला!

    वो देखो मय-कदे के रास्ते में, कोई अल्लाह-वाला जा रहा है| राहत इंदौरी 

  • 8th Jun 2024

    मगर सिक्का उछाला!

    न हार अपनी न अपनी जीत होगी, मगर सिक्का उछाला जा रहा है| राहत इंदौरी 

  • 8th Jun 2024

    चराग़ों को उछाला!

    चराग़ों को उछाला जा रहा है, हवा पर रो‘ब डाला जा रहा है| राहत इंदौरी 

  • 8th Jun 2024

    ज़हर पी के देखते हैं!

    पानियों से तो प्यास बुझती नहीं, आइए ज़हर पी के देखते हैं| राहत इंदौरी 

  • 8th Jun 2024

    दिन चढ़े ही!

    आज एक बार फिर से मैं प्रसिद्ध और श्रेष्ठ कवि श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी ने हमें अनेक अमर गीत दिए हैं|   सोम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत –…

  • 7th Jun 2024

    रास्ते वापसी के!

    टिकटिकी बाँध ली है आँखों ने, रास्ते वापसी के देखते हैं| राहत इंदौरी

  • 7th Jun 2024

    धूप इतनी कराहती!

    धूप इतनी कराहती क्यूँ है, छाँव के ज़ख़्म सी के देखते हैं| राहत इंदौरी

  • 7th Jun 2024

    क़ाफ़िले रौशनी के!

    रोज़ हम इक अँधेरी धुंद के पार, क़ाफ़िले रौशनी के देखते हैं| राहत इंदौरी

  • 7th Jun 2024

    ख़्वाब अगली सदी के

    नींद पिछली सदी की ज़ख़्मी है, ख़्वाब अगली सदी के देखते हैं| राहत इंदौरी

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