बाज़ार-ए-सुख़न!

जौहरी बंद किए जाते हैं बाज़ार-ए-सुख़न,

हम किसे बेचने अलमास-ओ-गुहर* जाएँगे|

*हीरे-मोती

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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