कौन फिर ऐसे में!

कौन फिर ऐसे में तन्क़ीद* करेगा तुझ पर,

सब तिरे जुब्बा-ओ-दस्तार** में खो जाते हैं

*विवेचना, **लंबा चोगा और पगड़ी  

मुनव्वर राना

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