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उन्हीं गहराइयों में हूँ!
तू आ चुका है सत्ह पे कब से ख़बर नहीं, बेदर्द मैं अभी उन्हीं गहराइयों में हूँ| अहमद फ़राज़
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गाँव का परिचय!
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज एक बार फिर से मैं, अपनी अलग किस्म की रचनाओं के माध्यम से किसी समय हिन्दी काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| निर्धन जी की…
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सभी रास्तों में हूँ!
मुझ से गुरेज़-पा है तो हर रास्ता बदल, मैं संग-ए-राह हूँ तो सभी रास्तों में हूँ| अहमद फ़राज़
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मैं दुश्मनों में हूँ !
तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ, मैं दुश्मनों में हूँ कि तिरे दोस्तों में हूँ| अहमद फ़राज़