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आ जाना प्रिय आ जाना!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य के एक महान सृजक, सभी विधाओं में अपना अमूल्य योगदान करने वाले स्वर्गीय सच्चिदानंद हीरानंद अज्ञेय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अज्ञेय जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है अज्ञेय जी की यह कविता –…
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छन रहा है नूर सा!
कुछ क़फ़स की तीलियों से छन रहा है नूर सा, कुछ फ़ज़ा कुछ हसरत-ए-परवाज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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नाम भी लेना है!
नाम भी लेना है जिसका इक जहान-ए-रंग-ओ-बू, दोस्तो उस नौ-बहार-ए-नाज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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दिल की रगों का टूटना
ये सुकूत-ए-नाज़ ये दिल की रगों का टूटना, ख़ामुशी में कुछ शिकस्त-ए-साज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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राज़ की बातें करो!
शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो, बे-ख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मैं इक दिन ख़ुद ही!
मुझ को समझाओ न ‘साहिर’ मैं इक दिन ख़ुद ही, ठोकरें खा के मोहब्बत में सँभल जाऊँगा| साहिर लुधियानवी
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मैं कोई मोम नहीं हूँ!
सोज़ भर दो मिरे सपने में ग़म-ए-उल्फ़त का, मैं कोई मोम नहीं हूँ जो पिघल जाऊँगा| साहिर लुधियानवी
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हम सब काशी के पंडे!
आज एक बार फिर मैं हिन्दी नवगीत के एक प्रमुख हस्ताक्षर और मेरे लिए गुरुतुल्य रहे, अत्यंत सरल स्वभाव के धनी स्वर्गीय कुँवर बेचैन जी का नवगीत शेयर कर रहा हूँ| बेचैन जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय कुँवर बेचैन जी का…
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तेरा वा’दा तो नहीं हूँ!
मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा, तेरा वा‘दा तो नहीं हूँ जो बदल जाऊँगा| साहिर लुधियानवी