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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Dec 2023

    गुज़रे जिधर से हम!

    माना कि इस ज़मीं को न गुलज़ार कर सके, कुछ ख़ार कम तो कर गए गुज़रे जिधर से हम|               साहिर लुधियानवी  

  • 22nd Dec 2023

    किसी की नज़र से हम!

    ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है, क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम|               साहिर लुधियानवी  

  • 22nd Dec 2023

    कुछ और बढ़ गए जो!

    कुछ और बढ़ गए जो अँधेरे तो क्या हुआ, मायूस तो नहीं हैं तुलू-ए-सहर* से हम| *Sunrise             साहिर लुधियानवी  

  • 22nd Dec 2023

    ज़माने के डर से हम!

    भड़का रहे हैं आग लब-ए-नग़्मागर से हम, ख़ामोश क्या रहेंगे ज़माने के डर से हम|              साहिर लुधियानवी

  • 22nd Dec 2023

    फिर मुझको रसखान बना दे!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी कवि सम्मेलनों और उर्दू मुशायरों में जिनको समान रुचि के साथ श्रोताओं द्वारा सुना जाता था, ऐसे स्वर्गीय बेकल उत्साही जी का गीत शेयर कर रहा हूँ|   बेकल जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय बेकल उत्साही जी…

  • 21st Dec 2023

    आग का दरिया देखूँ!

    टूट जाएँ कि पिघल जाएँ मिरे कच्चे घड़े, तुझ को मैं देखूँ कि ये आग का दरिया देखूँ|               परवीन शाकिर 

  • 21st Dec 2023

    और भी तुझ सा देखूँ!

    तू मिरी तरह से यकता है मगर मेरे हबीब, जी में आता है कोई और भी तुझ सा देखूँ|               परवीन शाकिर

  • 21st Dec 2023

    आँखों में उतरता देखूँ!

    मैंने जिस लम्हे को पूजा है उसे बस इक बार, ख़्वाब बन कर तिरी आँखों में उतरता देखूँ|               परवीन शाकिर

  • 21st Dec 2023

    उन होंटों का साया देखूँ

    फूल की तरह मिरे जिस्म का हर लब खुल जाए, पंखुड़ी पंखुड़ी उन होंटों का साया देखूँ|             परवीन शाकिर

  • 21st Dec 2023

    रुत में महकता देखूँ!

    मुझ पे छा जाए वो बरसात की ख़ुश्बू की तरह, अंग अंग अपना इसी रुत में महकता देखूँ|               परवीन शाकिर 

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