उन होंटों का साया देखूँ

फूल की तरह मिरे जिस्म का हर लब खुल जाए,

पंखुड़ी पंखुड़ी उन होंटों का साया देखूँ|

            परवीन शाकिर

One response to “उन होंटों का साया देखूँ”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💗

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