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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Dec 2023

    यात्रा!

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी वरिष्ठ गीतकार और संपादक श्री बालस्वरूप राही जी का गीत शेयर कर रहा हूँ|   राही जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बालस्वरूप राही जी का यह गीत – इन पथरीले वीरान पहाडों परज़िन्दगी थक गई है चढ़ते-चढ़ते…

  • 20th Dec 2023

    एक बच्चे की तरह से!

    सब ज़िदें उसकी मैं पूरी करूँ हर बात सुनूँ, एक बच्चे की तरह से उसे हँसता देखूँ|             परवीन शाकिर

  • 20th Dec 2023

    हर रोज़ तमाशा देखूँ!

    बंद करके मिरी आँखें वो शरारत से हँसे, बूझे जाने का मैं हर रोज़ तमाशा देखूँ|               परवीन शाकिर

  • 20th Dec 2023

    दिल को धड़कना देखूँ!

    तू मिरा कुछ नहीं लगता है मगर जान-ए-हयात, जाने क्यूँ तेरे लिए दिल को धड़कना देखूँ|               परवीन शाकिर

  • 20th Dec 2023

    तिरी याद में तन्हा देखूँ!

    एक इक कर के मुझे छोड़ गईं सब सखियाँ, आज मैं ख़ुद को तिरी याद में तन्हा देखूँ|              परवीन शाकिर

  • 20th Dec 2023

    भूलने वाले मैं कब तक

    शाम भी हो गई धुँदला गईं आँखें भी मिरी, भूलने वाले मैं कब तक तिरा रस्ता देखूँ|               परवीन शाकिर

  • 20th Dec 2023

    तन्हाई का सहरा देखूँ!

    नींद आ जाए तो क्या महफ़िलें बरपा देखूँ, आँख खुल जाए तो तन्हाई का सहरा देखूँ|              परवीन शाकिर 

  • 20th Dec 2023

    इंद्रधनुष!

    आज एक बार फिर मैं विख्यात हिन्दी कवि और संपादक स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की एक कविता  शेयर कर रहा हूँ|    नंदन जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कन्हैयालाल नंदन जी की यह कविता – एक सलोना झोंकाभीनी-सी खुशबू का,रोज़ मेरी नींदों को…

  • 19th Dec 2023

    और मैं क्या क्या देखूँ!

    अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ, इक ज़रा शेर कहूँ और मैं क्या क्या देखूँ|              परवीन शाकिर

  • 19th Dec 2023

    रूह को आबाद करके

    बदन मेरा छुआ था उसने लेकिन, गया है रूह को आबाद करके|           परवीन शाकिर  

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