भूलने वाले मैं कब तक

शाम भी हो गई धुँदला गईं आँखें भी मिरी,

भूलने वाले मैं कब तक तिरा रस्ता देखूँ|

              परवीन शाकिर

One response to “भूलने वाले मैं कब तक”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    💛

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