फिर मुझको रसखान बना दे!

आज एक बार फिर मैं हिन्दी कवि सम्मेलनों और उर्दू मुशायरों में जिनको समान रुचि के साथ श्रोताओं द्वारा सुना जाता था, ऐसे स्वर्गीय बेकल उत्साही जी का गीत शेयर कर रहा हूँ|  

बेकल जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ|

लीजिए आज प्रस्तुत है श्री स्वर्गीय बेकल उत्साही जी का यह गीत –

माँ मेरे गूंगे शब्दों को
गीतों का अरमान बना दे .
गीत मेरा बन जाये कन्हाई,
फिर मुझको रसखान बना दे .

देख सकें दुख-दर्द की टोली,
सुन भी सकें फरियाद की बोली,
माँ सारे नकली चेहरों पर
आँख बना दे,कान बना दे.

मेरी धरती के खुदगर्जों ने
टुकड़े-टुकड़े बाँट लिये हैं,
इन टुकड़ों को जोड़ के मैया
सुथरा हिन्दुस्तान बना दे .

गीत मेरा बन जाये कन्हाई,
फिर मुझको रसखान बना दे .

(आभार- एक बात मैं और बताना चाहूँगा कि अपनी ब्लॉग पोस्ट्स में मैं जो कविताएं, ग़ज़लें, शेर आदि शेयर करता हूँ उनको मैं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध ‘कविता कोश’ अथवा ‘Rekhta’ से लेता हूँ|)

आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|                                         

                                      ********  

3 responses to “फिर मुझको रसखान बना दे!”

  1. christinenovalarue avatar
    christinenovalarue

    🧡

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  2. जय श्री कृष्ण 🌺🙏🏻🌺नमस्कार

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    1. नमस्कार जी

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