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सज लिया करो!
देखो ये शहर है अजब दिल भी नहीं है कम ग़ज़ब, शाम को घर जो आऊँ मैं थोड़ा सा सज लिया करो| निदा फ़ाज़ली
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उसके लिए दुआ करो!
शोहरत भी उस के साथ है दौलत भी उस के हाथ है, ख़ुद से भी वो मिले कभी उसके लिए दुआ करो| निदा फ़ाज़ली
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वैभव के अमिट चरण चिह्न!
आज एक बार फिर मैं हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री रहे, कवि हृदय भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अटल जी की कुछ रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज उनके जन्मदिन के अवसर पर प्रस्तुत है स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी…
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घर में ख़ुदा ख़ुदा करो!
अच्छी नहीं ये ख़ामुशी शिकवा करो गिला करो, यूँ भी न कर सको तो फिर घर में ख़ुदा ख़ुदा करो| निदा फ़ाज़ली
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जीते जाओ सोचो मत!
घूम रहे हैं बाज़ारों में सरमायों के आतिश-दान, किस भट्टी में कौन ईंधन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली
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जैसा मालिक रक्खे!
हर मज़हब का एक ही कहना जैसा मालिक रक्खे रहना, जब तक साँसों का बंधन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली
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नाच सको तो नाचो!
नाच सको तो नाचो जब थक जाओ तो आराम करो, टेढ़ा क्यूँ घर का आँगन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली
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लिखा हुआ किरदार!
लिखा हुआ किरदार कहानी में ही चलता फिरता है, कभी है दूरी कभी मिलन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली
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जीते जाओ सोचो मत!
कठ-पुतली है या जीवन है जीते जाओ सोचो मत, सोच से ही सारी उलझन है जीते जाओ सोचो मत| निदा फ़ाज़ली