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यह विलाप नहीं है!
आज एक बार फिर मैं आधुनिक हिन्दी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| श्री वाजपेयी जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – यह विलाप नहीं हैएक नीरव प्रार्थना हैजो किसी देवता को…
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आँसुओं से लिखा हुआ!
जिसे ले गई है अभी हवा वो वरक़ था दिल की किताब का, कहीं आँसुओं से मिटा हुआ कहीं आँसुओं से लिखा हुआ| बशीर बद्र
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कहा हुआ न सुना हुआ
कोई फूल धूप की पत्तियों में हरे रिबन से बँधा हुआ, वो ग़ज़ल का लहजा नया नया न कहा हुआ न सुना हुआ| बशीर बद्र
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वो टूट भी सकती है!
शोहरत की बुलंदी भी पल भर का तमाशा है, जिस डाल पे बैठे हो वो टूट भी सकती है| बशीर बद्र
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जब बर्फ़ पिघलती है!
ख़ुश-रंग परिंदों के लौट आने के दिन आए, बिछड़े हुए मिलते हैं जब बर्फ़ पिघलती है| बशीर बद्र
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आँखों के लिफ़ाफ़ों में!
यूँ प्यार नहीं छुपता पलकों के झुकाने से, आँखों के लिफ़ाफ़ों में तहरीर चमकती है| बशीर बद्र
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यूँ याद तिरी शब भर!
लोबान में चिंगारी जैसे कोई रख जाए, यूँ याद तिरी शब भर सीने में सुलगती है| बशीर बद्र
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सद्भावना गीत!
आज एक बार फिर मैं आज के लोकप्रिय हास्य-व्यंग्य कवि और कुशल मंच संचालक श्री अशोक चक्रधर जी द्वारा लिखा गया सद्भावना गीत शेयर कर रहा हूँ| चक्रधर जी की बहुत सी रचनाएँ मैं पहले भी शेयर कर चुका हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी का यह गीत – गूंजे गगन में,महके…
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चिलमन सी सरकती है!
जब रात की तन्हाई दिल बन के धड़कती है, यादों के दरीचों में चिलमन सी सरकती है| बशीर बद्र
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मेरे लिए जगह करो!
मेरी नशिस्त* पे भी कल आएगा कोई दूसरा, तुम भी बना के रास्ता मेरे लिए जगह करो| *बैठक निदा फ़ाज़ली